माननीय उच्च न्यायालय के पक्ष में निर्णय के उपरांत उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम, गोरखपुर इकाई ने वर्ष 2014 में निर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया था। इस भूखंड पर महाविद्यालय के नवीन भवन के निर्माण का कार्य वर्ष 2019 में संपन्न हुआ और पत्रांक 220|रा.म.ई|2019-20/ दिनांक 10-10-2019 को निर्माण इकाई द्वारा भवन हस्तांतरित किया गया।
महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर केवल आठ विषयों— हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, प्राचीन इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, एवं भूगोल की कक्षायें संचालित हो रही हैं। महाविद्यालय आरम्भ से इस बात के लिए जागरूक रहा है कि यहाँ स्थापनाकाल से ही सम्बद्धता प्राप्त स्नातक स्तर के वाणिज्य एवं विज्ञान संकायों की कक्षाएं भी संचालित हों, क्योंकि इस महाविद्यालय को कला संकाय के साथ-साथ इन दोनों संकायों की भी अस्थाई सम्बद्धता महामहिम कुलाधिपति द्वारा प्रदान की गई थी। लगभग आठ-नौ वर्ष तक वाणिज्य एवं विज्ञान संकाय की सम्बद्धता बढ़ती रही किन्तु बाद में विश्वविद्यालय द्वारा गठित निरीक्षण मंडल ने पद सृजन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय आदि कमियों का उल्लेख करते हुए अस्थाई सम्बद्धता हेतु संस्तुति देने से इनकार कर दिया। पुनः वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय द्वारा गठित निरीक्षण मण्डल ने अपने निरीक्षण के दौरान वाणिज्य संकाय की अस्थाई सम्बद्धता प्रदान की।
अतिरिक्त जानकारी:
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) के अंतर्गत सम्मिलित इस महाविद्यालय को उन्नयन हेतु 2 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त है। इसमें से उ०प्र० आवास एवं विकास परिषद द्वारा वाणिज्य संकाय के अंतर्गत बी०कॉम० की कक्षाओं के संचालन हेतु तीन व्याख्यान कक्षों का निर्माण पूर्ण हो गया है, जिसका हस्तांतरण अभी नहीं हुआ है। बी०कॉम० की कक्षाओं के संचालनार्थ तत्सम्बन्धी वाणिज्य शिक्षकों का पद सृजन हेतु शासन में पत्र भेजा गया है। पद सृजन की प्रक्रिया शासन स्तर पर लंबित है। शासन द्वारा प्रवक्ता वाणिज्य के पदों की स्वीकृति के पश्चात बी०कॉम० की कक्षाओं का संचालन प्रारम्भ कर दिया जायेगा।